विश्व मलेरिया दिवस
(25 अप्रैल विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर )
विश्व मलेरिया दिवस, प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है
।यह मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए
निरंतर निवेश और राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता को उजागर करने का एक अवसर प्रदान करता है ।विश्व मलेरिया दिवस 2022 ‘मलेरिया रोग के बोझ
को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग’ विषय के अंतर्गत सुनिश्चित किया जा रहा है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के
सदस्य राज्यों द्वारा 2007 विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान इस दिवस की स्थापना की गई थी।
एक पुरानी कहावत है ‘एक तंदुरुस्ती
हज़ार नियामत’ । स्वस्थ शरीर में
स्वस्थ मन बसता है । आधुनिक विज्ञान
के विकास
के चलते नई-नई संभावनाएं हमारे
पास हैं पर समस्याएँ
भी कम नहीं हैं ।
मनुष्य इन सारी समस्याओं से कभी हार
नहीं माना है ,बल्कि उसे चुनौती समझकर सामना किया है ।कोविड19 महामारी
की तरह मलेरिया भी सालों से हमारे देश के स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन कर
देश के विकास में रोड़ा बन कर खड़ा है ।
मलेरिया एक खतरनाक बीमारी
है । मादा एनोफिलिश मच्छरों की लार में प्लाजोमोडियम नामक एक सूक्ष्म परजीवी
पाया जाता है ।इसलिए मादा एनोफिलीज़ मच्छर ही मलेरिया फैला सकता है । मादा एनोफिलीज़
मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता है तो उस व्यक्ति के खून में यह परजीवी डाल
देता है और उस व्यक्ति को मलेरिया हो जाता है।मलेरिया पीड़ित व्यक्ति को जब मच्छर
काटता है ,उसके खून से इस परजीवी को मच्छर अपने
शरीर में लार के माध्यम से ले लेता है । इस प्रकार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को
मच्छर काटने से मलेरिया हो जाता है
।
मच्छर
ज़्यादातर गरम देशों में पाये जाते हैं । मच्छर
बहुत ज्यादा
ऊंचाई पर ठंडे मुल्कों में
नहीं मिलते हैं । मादा एनोफिलीज़ मच्छर
रात में ही काटती है दिन के अंधेरे में ठंडे तथा नम स्थानों पर छुपी रहती है ।बगीचे
में रुका पानी ,धान के खेत में ,घरों की खुली टंकियाँ , अव्यवहृत कुआं ,धीरे से प्रवाहित होनेवाला झरने का पानी
, पुरानी टायरों में रुका
पानी , नलकूपों के पास रुका हुआ पानी ,सड़क के किनारे जमा
पानी ,गड्ढों में जमा पानी आदि स्थानों में ये
मच्छर अंडे देते हैं । वयस्क मादा मच्छर की लार में शुरू से ही परजीवी नहीं होते
हैं ।ये परजीवियों को मच्छर मनुष्य के रक्त से ही लेती है तथा एक बार इनकी लार में
परजीवी आ जाते हैं तो जब तक वह जिंदा
रहता है,मलेरिया फैला सकता है ।
ओड़िशा के कुछ जिले हैं जिन में मलेरिया का प्रभाव ज्यादा हैं जैसे
मयूरभंज ,गजपति, नबरंगपुर ढेंकानाल ,नुआपाड़ा, कालाहांडी ,कंधमाल ,कोरापुट ,गंजाम, मालकनगिरी,तथा रायगड़ा आदि ।इनमें से कुछ जिलों में मलेरिया के कंपकंपी के लक्षण कम दिखाई देते
हैं ,पर खून की जांच करने पर मलेरिया के
परजीवी पाये जाते हैं । इसलिए लक्षण के अनुसार खून की
जांच करना ठीक नहीं बल्कि बुखार दो से ज्यादा दिन तक टिकने से खून की जांच करवाना उचित
है । ओड़िशा में सामान्यतः दो प्रकार के मलेरिया परजीवी
पाये जाते हैं -प्लाज्मोडियम वाइवक्स और
प्लाज्मोडियम फल्सिपेरम ।
ये सर्वविदित
है कि मलेरिया
के लिए मच्छर ही जिम्मेदार है अतः दो चीजों से
बचाव किया जा सकता है-मच्छरों से अपने आप
को बचाना और मच्छर को कम करना । रोकथाम के
लिए दोनों ही चीजें जरूरी है । तीसरी
चीज यह
भी है कि प्रभावित इलाकों में मलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाना ।
मच्छर घर के रुके हुए पानी में
पलते हैं ,इसलिए घर के चारों ओर के गड्ढे को भर
देना चाहिए । अगर कहीं पानी जमा हुआ पाया जाय तो उसे साफ करना चाहिए । अधिकतर ये
देखा गया है कि ओड़िशा के कई इलाकों में बाढ़ या बारिश के बाद मलेरिया के रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है । इसका कारण यह है कि बाढ़ या बारिश में घर के
आसपास जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती
है ।जिसमें मच्छरों को पनपने का मौका मिल जाता है । गाँव के लोग उस पानी में
केरोसिन डाल देते हैं जिस से मच्छर मर जाते हैं
। घर में पानी की टंकी व कूलर की नियमित सफाई करते रहना चाहिए ।
अव्यवहृत कुएं को मिट्टी से भर देना चाहिए ।खास तौर पर प्रत्येक
परिवार को ये देख लेना चाहिए कि घर के आसपास पानी जमा न होने पाये । घर के अंदर जहां मच्छर दिन में छिपे रहते हैं ,उन स्थानों को साफ रखना चाहिए ।कपड़ों को
इधर-उधर न रखकर कप-बोर्ड ,अलमारी या बॉक्स के अंदर
रखें ताकि मच्छर छिपकर न रह सकें ।इसके अलावा मच्छर मारने की
दवा का
छिड़काव करने की भी आवश्यकता
है । सरकार
को मलेरिया विभाग के कर्मचारियों को पूरी तरह
सहयोग करना चाहिए ।इन दवाओं के छिड़काव के बाद कम से कम से तीन महीने तक पुताई
नहीं करवानी चाहिए । शाम के समय घर में नीम की पत्तियों का धुआं करना चाहिए
ताकि मच्छर
मर जाएँ ।
मच्छरों
को काटने से अपने आप को बचाने के
तरीकों पर ध्यान देने के लिए शाम से पहले घर के खिड़की दरवाजे बंद कर देने चाहिए । बाज़ार में मिलनेवाले मच्छर
भगानेवाले
पदार्थ का उपयोग शाम होने से पहले कर देना उचित है । रात में मच्छरदानी लगाकर सोना
मलेरिया रोग से बचने का सबसे सरल तरीका है ।
रोकथाम की व्यवस्था की
अज्ञानता के कारण ज्यादा से ज्यादा लोग मलेरिया का शिकार हो जाते हैं ।हमें गाँव-गाँव शहर-शहर मच्छरदानी के
प्रयोग तथा दवाई लेने के तरीकों के बारे में जागरूक करना आवश्यक
है।अभी भी ओड़िशा के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बुखार आने से लोग अस्पताल जाने के बदले तांत्रिक के पास
पहुँच जाते हैं।इसलिए मलेरिया से बचने केलिए नुककड़ नाटक ,सामूहिक सफाई अभियान ,लोकनृत्य जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा सकता है ।
मलरिया एक
खतरनाक बीमारी है जो 48 से 72 घंटे के अंदर उपयुक्त चिकित्सा न करने
पर जानलेवा साबित हो सकती है ।अतः खून की जांच करने के बाद चिकित्सक की सलाह के
अनुसार दवा का पूरा कोर्स लेना आवश्यक है ।आधे-अधूरे इलाज से मलेरिया दुबारा होने
की आशंका है ।आजकल मच्छरों की प्रकृति बदल रही है ।पहले
मच्छर डीडीटी से मर जाते थे पर अभी डीडीटी का असर कम दिखाई दे रहा है । मच्छरों ने
अपने रहने के स्थानों पर भी बदलाव लाना शुरू कर दिया है । अतःजहां
डीडीटी असर नहीं कर रहा है वहाँ मच्छरदानी या औषध से उपचार किया गया मच्छरदानी
का इस्तेमाल करके मलेरिया का निवारण किया जा सकता
है ।
स्वस्थ रहने के लिए
स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है । स्वच्छता
घर के अंदर की और बाहर की जरूरत है । प्रत्येक
व्यक्ति को ये आदत डाल लेनी चाहिए कि रोज हम घर की और अपने आसपास की सफाई करें तभी हम बीमारी से छुटकारा पा सकते
हैं और समाज को
खुशहाल देख सकते हैं ।
copyright@ दिलीप
कुमार बाड़त्या
जवाहर
नवोदय विद्यालय,बौद्ध
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dbadatya@gmail.com
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