इंसान का सखु -दःु ख न है यहाँ न है वहा ं ,
मटट के पीछे भागता है जहाँ ,
एक नौकरवाला इसान भी सोचता है खरद लँ,ू
एक टुकड़ा मटट का पर,
वह यह य नहं सोचता जीवन-मरण
सब खेल है सिृ ट का,
इंसान न तो खरद पाता है ।
न चैन
इंसान का सखु -दःु ख न है यहाँ न है वहा ं ,
मटट के पीछे भागता है जहाँ ,
एक नौकरवाला इसान भी सोचता है खरद लँ,ू
एक टुकड़ा मटट का पर,
वह यह य नहं सोचता जीवन-मरण
सब खेल है सिृ ट का,
इंसान न तो खरद पाता है ।
न चैन
प्रश्नोत्तरी -हिन्दी
1. निम्न
में से कौन-सी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्णित नहीं है?
(a) नेपाली
(b) कश्मीरी
(c) सिन्धी
(d) अंग्रेजी
2. प्राणप्रिया’ का सही समानार्थी शब्द बताइए?
A. सहचरी
B. अर्द्धांगिनी
C. प्रेमिका
D. संगिनी
3. निम्नलिखित
में से कौन-सी प्रेमचंद की एक रचना है?
A. पंच-परमेश्वर
B. उसने कहा था
C. ताई
D. खड़ी बोली
4. वर्तमान
में भारतीय संविधान में कितनी राजभाषाएं (Official Language)वर्णित हैं?
(a) 24
(b) 22
(c) 14
(d) 25
5. कोणार्क निम्न में से किस लेखक का है ?
A) राम कुमार वर्मा
B) नरेश शर्मा
C) लक्ष्मी नारायण वर्मा
D) जगदीश चन्द्र माथुर
6.सही विकल्प का चयन
कीजिए
(a) जोत्सना
(b) ज्योत्सना
(c) ज्योत्स्ना
(d) ज्यौत्स्ना
7.क्ष’ वर्ण किसके योग से बना है ?
(A) क् + ष
(B) क् + छ
(C) क् + च
(D) क् + श
8.निम्न मे से शुद्ध
वर्तनी का चयन कीजिए ?
(A) अपकीर्ति
(B) अपकर्ति
(C) अपकीर्ती
(D) अपकिती
9)फल ऑफ़ ए स्पैरो
पुस्तक के लेखक कौन है?
क) रबिन्द्र
सिंह
ख) अरुंधती
रे
ग) ममता
कालिया
घ) सलीम
अली
10.खाली स्थान भरो-
प्रेम करना तलवार
की------- चलना है।
A.सर पर
B.धार पर
C.नोक पर
D.नाम पर
11.निम्नलिखित शब्दों
में तत्सम शब्द है ?
A) चूर्ण
B) बच्चा
C)जनम
D)काज
12.आँख बिछाना का मतलब
है-
A)देखते रहना
B)आंख लगाना
C)आँख फैलाना
D)प्रतीक्षा करना
A)कश्मीर में अनेक दर्शनीय स्थल देखने योग्य
हैं ।
B) कश्मीर
में दर्शनीय स्थल अनेक देखने योग्य हैं ।
C)कश्मीर
में अनेक दर्शनीय स्थल देखने योग्य हैं ।
D) कश्मीर
में अनेक दर्शनीय स्थल हैं ।
निम्न में से एक काव्य
रसखान जी का है
14.पोंगल त्योहार
-------महीने (हिदी महीने) में मनाया जाता है?
A)माघ
B)वैशाख
C)पौष
D)आषाढ़
D)प्रेम सारिका
15.एवेरेस्ट का नाम
सागरमाथा भी है, ये नाम किन देशों के लोगों ने दिया है
A)नेपाल
B)तिब्बत
C)भूटान
D)चीन
16.निम्न में से किस
पुस्तक को ज्ञान पीठ पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है ?
A)गोदान
B)उर्वशी
C)निर्मला
D)कर्मभूमि
1. रीढ़ की हड्डी एकांकी का रचनाकार कौन है?
2.चन्द्र शेखर वेंकट
रमण का जन्म कब हुआ था ?
3.सागर यात्रा पाठ का
अनुवाद किसने किया है?
4.रेणु किसका उपनाम है ?
5.इंडियन एसोसिएशन फॉर
दा कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस संस्था कहाँ है ?
1.रैदास का पूरा नाम
क्या है ?
2. सत्य का प्रयोग
किसकी लिखी गयी पुस्तक का नाम है ?
३.सुधा चंद्रन की कौन सी टांग में गेंग्रिन
हो गया था ?
4. विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित
एक पाठ का नाम बताओ ?
5.लोहड़ी का त्योहार
कौन से राज्य में मनाया जाता है?
1.चन्द्र गहना से
लौटती बेर कविता के कवि कौन हैं ?
2.पुस्तकें जो अमर हैं
पाठ का लेखक कौन हैं?
3.शुक्र तारे के समान
पाठ का लेखक कौन हैं?
4.एक कुत्ता एक मैना
पाठ का लेखक कौन हैं ?
5.बस की सैर कहानी में
मुख्य चरित्र कौन हैं ?
1 .तुम कब जाओगे अतिथि
पाठ का लेखक कौन हैं?
2.ईश्वरचन्द्र
विद्यासागर कौन से राज्य के निवासी थे ?
3.निराला किस का उपनाम
है ?
4.आषाढ़ का पहला दिन कविता के कवि कौन हैं ?
5.एक फूल की चाह कविता
के रचयिता कौन हैं ?
1.सही वाक्य पहचाने
क)सारे देश भर में ख़ुशी मनाई गयी।
ख)सारे देश में ख़ुशी
मनाई गयी।
ग)देश में सारे ख़ुशी
मनाई गयी।
घ)देश में सारे
ख़ुशियां मनाई गयी।
2.प्रेमचंद के फटे फटे
जूते पाठ के लेखक कौन हैं?
3.गोदान किसकी रचना
हैं ?
4. दुःख का अधिकार
कहानी के कहानीकार का नाम क्या है ?
5.यमराज की दिशा कविता
के कवि कौन हैं ?
6.आम के आम गुठली के
दाम अर्थ क्या है?
7.सस्ते का चक्कर
एकांकी का एकांकीकार कौन हैं ?
8.पोंगल कितने दिन तक
मनाया जाता है ?
प्रस्तुत
कर्ता –दिलीप कुमार बड़त्या
Essay-What can I do for a Clean India?
All good things must start somewhere and even the greatest
feats have started from a single thought that leads into action”.Swachha Bharat Abhiyan aims at clean and hygienic
India so I will take this cleanliness programme
in a movement with my friends to help ourselves to achieve this great goal of
our country. There are two types of cleanliness.(i)Internal Cleanliness: Through the practice of the proper cleanliness I can keep
myself physically and mentally clean ,
(ii)External Cleanliness- I should always take care
and observe our surrounding cleanliness to make our future healthy.
First I will keep clean myself & my school for which I have to take
promises- Stop spitting , Stop
littering ,Say No to plastic.
convince friends to keep these
promises.
I can spend two hours per week for
volunteer work for clean our school and nearby villages. We can put some
posters with cleanness messages in villages where common people answer their
natural calls roadside. I can keep the wrappers in my bag during journey. Politely
I can make them understand not to litters
If they are not listening my words simply I will pick up wrappers and keep in
my bag.As far as possible I will reuse things from waste to best .I can use posters or good
thoughts about cleanness in workplace and surroundings where people spit. I
will put my efforts to use cloth bags when purchasing in market. I will
encourage my friends and relatives to make paper bags to use in day to day life
then only we can refuse polythenes when
seller offers . A small steps can make
our country Swachha Bharat Swastha Bharat.
Shreya Badatya
Class -X
TOPIC: FAITH
ON DIVERSITY OF CULTURE(WORD LIMIT 250)
There
was a village named Chandrapur.There were four friends named Smita ,Ranbir ,Anthony and Zaid .After
time passed they grew up and were busy in their own life. Now Smita was a
housewife having two daughters.
Once
Smita‘s younger daughter asked to her to tell a memorable story of her
childhood days. Then Smita told that the memory of those fateful days is still
fresh in my mind though many years have passed.
She told about an incident of her childhood days .One day we all friends
were playing in our home and heard sound of shouting in front of our home. We
all were afraid of the riot among villagers my father not allowed us to go outside. At that time Zaid told to go his
home but my father told to stay with us until riot stops.
The
next day when we rush to School as usual Anthony gave a JesusChrist locket to
all of us as a mark of our friendship. When we are returning from school we
went to Krishna temple to pray .They were pleased to receive Tulsi leaves from
temple Brahmin as a mark of blessing.
When
we returned from temple on the way we heard bell of church and Zaid told us
‘friends! Let us go to Church to pray for peace in our village” all of us
entered to church and Father of church received us with smile and explained
about the omnipresence of God. Afterwards we four friends became the exemplar
for others to faith each others culture.
Principle of Reward and Blame.
Praise is a necessity for all human beings and to a
few of the animals. It is non existent in plants and animals. It is a mental
necessity of the higher living creatures. It is very much related to school
education .The school has always been one of the major spheres of activity for
psychology. Today school education has expanded a lot and the complexion of the
students, teachers, and the management is changing in profile.
Praise
and blame both the terms have equal importance in life. Where there is no
praise there is laziness .There is a hunger for praise in every human heart. There
is a horror of blame. This quality of human nature is universal and it is
vastly more powerful then we have ever cared to admit.
We
instinctively feel if people approve of me, I will safe. As we commonly say
self preservation is the first law of nature .The fact is that praise is necessary
as food, if we get it in moderation and balanced, when necessary. Praise is
sunshine that ripens us. Also when it is to intense it rots us .If one goes in
history, learning has been the anchor point in the development of modern
psychology. The experiments of Thorndike gave us better understanding of the
learning process, in spite of contracting viewpoints. Thorndike, in formulating
his laws of learning was mainly concerned with the acquisition of a skill in
the process of rewards.
Praise
and blame are the heaven and hell of all religions. All religions give their
God what they value most that is praise .Hymns and prayers are the literatures
of praise .Every persons has a right to self respect .He has a right to be praised
when he deserves it and he needs blame, when he deserves of such in the justice that the mass of man wish for .Practically,
it comes to this that we should make both praise blame definite .No man is all
good or bad ,if you point out his merits as well as his defects. Both are
indispensable to human development.
Dillip
Kumar Badatya
PGT(Hindi)
JNV,PALJHAR.BOUDH. dbadatya@gmail.com
www.dillipbadatya.in
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| हररिशंकर परसाई |
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| फतुरानन्द (ओड़िया व्यंग्य लेखक) |
हरिशंकर परसाई और ओड़िआ व्यंग्यकार फतुरानंद की कहानियों में व्यंग्य :एक तुलनात्मक अध्ययन
उपक्रम : हिंदी व्यंग्य की राष्ट्रीय परंपरा में
परसाई जी सबसे अधिक उल्लेखनीय लेखक माने जाते हैं। परसाई की व्यंग्य चेतना एक गहरे सामाजिक
दायित्वबोध से पैदा हुई है। वे एक लेखक की हैसियत से अपने समय की चुनौतियों का
सामना करते हैं। उनकी लेखन कला अनुभवों की व्यापकता और विचारों की गहराई दोनों से
संपन्न है। वैसे तो हिंदी साहित्य में भारतेंदु युग से व्यंग्य कहने की परंपरा थी,परन्तु
परसाई जी व्यंग्य को एक विधा का रूप दिया और उसी को माध्यम बनाकर उन्होंने
व्यंग्यात्मक कहानियाँ लिखीं ।
उसी प्रकार ओड़िआ
साहित्य की कहानी के विकास में फतुरानंद की कहानियाँ अनन्य और असाधारण है। वैसे तो
ओड़िआ साहित्य की व्यंग्य परंपरा के प्रतिष्ठित कहानीकार फकीरमोहन सेनापति की
कहानियों में पाई जाती है। आगे चलकर इसी व्यंग्य साहित्य की धारा में गोदावारिश
महापात्र, जदुमणि, गोपालचन्द्र प्रहराज, बलदेव रथ इत्यादि लेखकों का योगदान रहा।
भारत की स्वतंत्रता के उपरांत ओड़िआ व्यंग्य साहित्य में उत्पन्न खालिपन को अपने
हास्यरसपूर्ण व्यंग्य लेख से भरने का श्रेय प्रतिष्ठित व्यंग्यकार फतुरानन्द को ही
जाता है। कहानी की मौलिकता और संवेदना की गहराई की दृष्टि से फ़तुरानंद
ने ओड़िआ व्यंग्य कहानी लेखन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया
है।
परसाई और फ़तुरानंद जी
का वैशिष्ट्य :
परसाईजी ने तत्कालीन सामाजिक विसंगतियों, पाखंड और भ्रष्टाचार के कारणों को ढूंढ ढूंढ कर बेबस लाचार आदमी का हौसला बढ़ाया । उन्होंने अपने समय के सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक और आर्थिक परिवेश में व्याप्त विसंगतियों को परखा और उनका खुलकर विरोध किया । जो स्थिति हिन्दी साहित्य के समकालीन कहानिकारों के बीच परसाईजी की है, वही स्थिति ओड़िआ कहानी में फतुरानंद जी की है अतः दोनों कहानीकारों की कहानियों का मूल्यांकन वर्गीकृत अध्ययन किया जा सकता है ।
परसाई और फतुरानंद की कहानियों का वर्गीकृत अध्ययन :
I.
राजनैतिक कहानियाँ:
परसाई और फतुरानंद ने राजनैतिक विषयवस्तु पर बहुत-सी कहानियाँ लिखी हैं। एक और फतुरानंद ने
भारतीय राजनीति को दृष्टि में रखते हुए अन्तराष्ट्रीय
राजनीति पर अपने पौनी नजर डाली है। उन्होंने दो महान
शक्तिशाली देश अमेरिका और रुस पर व्यंग्य करते हुए “शिमिलि तुला” कहानी में एक को
पूँजिपति बम और दूसरे को सर्वहरा बम कह
दिया हैं । दूसरी ओर परसाई जी राजनीति से संबंधित “भेड़े और भेड़िये” कहानी
में बूढा सियार को पूँजिपति राजनेता का प्रतिक माना है , जो अन्य अफसरों की मदद से
निरीह जनता पर जुल्म जमाये हुए हैं ।
II.
सामाजिक कहानियाँ :
परसाई और फतुरानंद की कहानियाँ उनके जीवनानुभव को दर्शाती हैं । अतः स्वभाविक हैं कि दोनों की कहानियों में
सामाजिक जीवन की तस्वीर उभरता हैं । एक ओर “ सेवा का शोक ” कहानी में रइसों की सेवा करने
की शोक पर तीखा व्यंग्य है तो दूसरी ओर “ एक मध्यवर्गीय कुता ” कहानी में समाज के मध्यवर्गीय व्यक्तियों के चरित्र पर
व्यंग्य किया गया है ।
फतुरानंद की कहानियों में हास्यरस के गहराई के साथ–साथ
स्वस्थ सामाजिक जिम्मेदारी का दर्शन होता है ।कहीं-कहीं उनकी कहानियों में आधुनिक
समाज ही कथ्य के रूप में सामने आता है ।
उनकी प्रत्येक कहानी वास्तव धर्मी है । उन्होंने “ कलिकती चेंक ” कहानी के माध्यम
से समाज में फैले नकारात्मक पहलू को उभारने का भरसक प्रयास किया
है।
III.
साहित्यिक तथा शैक्षणिक कहानियाँ :
परसाई जी और फतुरानंद जी अपनी कहानियों में शिक्षा, साहित्य जगत भारतीय संस्कृति की बिड़म्बनाओं का चित्रण किया हैं । दोनों लेखकों
की साहित्यिक कहानियों में समान
प्रवृतियाँ पाई जाती हैं। फतुरानंद की “साहित्य मारु” कहानी में अपनी प्रतिष्ठा को
बनाए रखने के लिए साहित्य में चल रहे चौर्य प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया गया है । “बहादुरी के बीके”
कहानी में परसाई जी उन लेखकों पर व्यंग्य किया हैं , जो नीति – अनीति से जैसे
भी हो सके अपनी पुस्तकों पर अधिकतम लाभ
कमाना चाहते हैं । ‘रिसर्च का चक्कर’ में उन आचार्यों पर व्यंग्य है जो शोध के नाम पर छात्रों से अपनी निजी स्वार्थ
की पूर्ति करवाते हैं । फतुरानंद की “भालू कवि” में आधुनिक कवियों पर तीखा व्यंग्य
किया गया हैं । परसाईजी ‘अपने –अपने ईष्टदेव’
में साहित्य के क्षेत्र में
व्याप्त विसंगतियों पर व्यंग्य किया है ।
IV.
धार्मिक कहानियाँ :
परसाई की कहानियाँ
विषय की दृष्टि से वैविध्यपूर्ण है । उन्होंने अपने कहानियों में समाज के साथ धर्म
को भी महत्व दिया है । फतुरानन्द की
‘खेचेरिबाबा’ परसाई की ‘एक गोभक्त की भेंट, टार्च बेचनेवाला’ अदि कहानियों में धर्म की कुरूपता और अंधविश्वास पर व्यंग्य किया गया हैं ।
शिल्पगत – अध्ययन : परसाई और फतुरानंद की
कहानियो मे प्रयुक्त भाषा अत्यंत सरल और सहज है। उनकी कहानियाँ पाठकों पर पूर्ण प्रभाव छोड़ती हैं
। परसाई जी हिंदी की उक्तियों , कहावतों और मुहवरों का पुरातन भंडार को निकाल फेंका हैं । अपनी
कहानियों के द्वारा उन्होंने नयेयुग की आवश्यकता के अनुरूप खड़ीबोली की सम्प्रेषण
क्षमता को बढ़ाया । फतुरानन्द की वाक्य सरंचना में उपमा और अनुप्रास की छटा देखने
को मिलती है। उन्होंने ग्रामीण अप्रचलित शब्दों के प्रयोग में नवीनता दिखाई है ।
कहीं-कहीं हास्य रस और व्यंग्य के मिश्रण से कहानी में रोचकता आ गयी है ।
निष्कर्ष : परसाई और फतुरानंद की कहानियाँ पाठकों के दिलों दिमाग में एक हलचल पैदा करती
हैं ........... उनकी बातें और विचार पाठकों की चेतना का हिस्सा बन जाता है .....
कहा जाता है परसाई छिद्रान्वेषी हैं , किन्तु यह छिद्रान्वेषण समाज के बिसंगतियों
को दूर करने के लिए हुआ है....फतुरानन्द की कहानियों में भी अश्लीलता तथा नारी के
रूप वर्णन की आतिशयोक्ति का आरोप हुआ है, परन्तु उनका ये वर्णन विषयवस्तु को
समग्रता प्रदान करने के लिए हुआ है........
संक्षेप में परसाई और फतुरानंद की कहानियों का कथ्य जहाँ विराट है, वहीँ उसका शिल्प–विधान मौलिक है एवं उनका व्यंग्य उत्कृष्ट हैं.......
लेखक
–
दिलीप कुमार बाडत्या पी.जी.टी.(हिंदी)
जवाहर नवोदय विद्यालय, पल्झर,बौध ,ओडिशा
ଲୁହ ଏପରି ଏକ ସାଙ୍କେତିକ ଭାଷା ଯାହାକି ସଂସାର ର ସବୁ ଭାଷା ର ଲୋକ ବୁଝି ପାରନ୍ତି । ଲୁହ ର ଭାଷା ବୁଝିବା ପାଇଁ ବୟସ ଓ ଜ୍ଞାନ ର ଆବଶ୍ୟକତା ନ ଥାଏ । ଆବଶ୍ୟକ ହ...